Ravi Shankar Guruji
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शंखचूड़ कालसर्प योग के असर, उपाय और निवारण

काल सर्प दोष क्या होता है

शंखचूड़ कालसर्प योग:सबसे पहले हम सूक्ष्म में यह जान लेते है कि आखिर यह काल सर्प दोष क्या होता है ? काल सर्प दोष किसी जातक की कुंडली में वह योग है जिसमें ग्रह एक प्रकार से सीधे रेखा में आ जाते है और राहु व केतु के बीच में होते है |

लेकिन हमारे ध्यान इस बात होना चाहोये कि आखिर इस दोष से होता क्या है ? काल सर्प दोष ज्योतिष शास्त्र ने अनुसार सबसे अशुभ योग माना जाता है और इसके उचित कारण भी है | इस दोष से प्रभावित जातक जीवन की हर दिशा में मात खाता है |

यह अनिवार्य नहीं कि सभी जातकों को सभी समस्या होंगी, क्योंकि हर जातक के बाकी के ग्रह अलग अलग घरों में हो सकते है और इस कारण काल सर्प दोष के प्रभाव भी अलग अलग हो सकते है |

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कुंडली में कैसे दिखता है काल सर्प दोष ?

भारतीय ज्योतिष में प्रचलित काल सर्प दोष की परिभाषा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति विशेष की जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य पड़ते है तो उस दशा को काल सर्प दोष माना जाता है |

राहु और केतु के बीच ग्रहों की दशा और दिशा हर कुंडली में अलग अलग होती है और इन सबके हिसाब से ज्योतिष शास्त्र काल सर्प दोष को कुल १२ प्रकार में विभाजित करता है | आइये अब हम जानते है, इनमें से शंखचूड़ काल सर्प दोष के बारे में |

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शंखचूड़ काल सर्प योग

भारतीय ज्योतिष के अनुसार जब जातक की कुंडली में राहु नवें घर में और केतु तीसरे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में नवां घर पित्रों तथा पूर्वजों का घर माना जाता है और इस घर में यदि कोई अशुभ ग्रह विराजमान हो तो वह पितृ दोष पैदा करते है | शंखचूड़ काल सर्प दोष में नवें घर में राहु के होने से पितृ दोष उत्पन्न होता है |

शंखचूड़ काल सर्प योग के असर

  • इस योग में जातक को जीवन में कई उतार चढ़ाव देखने को मिलते है |
  • ये जातक अहंकारी भी हो सकते है |
  • यह दोष संतान और पिता के मध्य दूरियां उत्पन्न कर सकता है |
  • नौकरी और वयवसाय में लगातार असफलता मिल सकती है |
  • किसी कुंडली विशेष में शंखचूड़ काल सर्प दोष के होने पर जातक के जीवन में पितृ दोष का संयोग बना रहता है |

शंखचूड़ काल सर्प योग के उपाय

  • चांदी से निर्मित राहु यंत्र को जातक प्रति शनिवार को धारण करके रखे |
  • जातक श्रावण माह में प्रति सोमवार व्रत रखे व भगवान शिव का रुद्राभिषेक करे |
  • मगलवार को जातक लाल आसन पर बैठकर एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करे और सात बार बजरंग बाण का पाठ करें |
  • ऐसे जातकों को चांदी की अंगूठी में गोमेद रत्न के साथ धारण करना चाहिए |
  • जातक अपने पिता का ह्रदय से आदर करे और उनकी मृत्यु होने पर उनका विधिवत क्रिया कर्म करे |

शंखचूड़ काल सर्प योग के जातक क्या न करें

  • यदि कभी जातक और जातक के पिता के मध्य कोई कहासुनी हो जाये तो जातक विवाद करने के बजाय तुरंत पिता से क्षमा मांग लेनी चाहिए और बात को आगे बढ़ने से रोक लेना चाहिए |

शंखचूड़ काल सर्प योग का निवारण

काल सर्प पूजा अब जानते है कि कैसे जातक शंखचूड़ काल सर्प दोष का सम्पूर्ण निवारण कर सकता है ? जैसा कि हम सब जानते है कि किसी भी काल सर्प दोष का सर्वोच्च उपाय भगवान शिव की पूजा करना है | जातक तो चाहिए कि वह भगवान शिव की वंदना हेतु बिना किसी विलम्ब के प्रबंध करे |

त्र्यम्बकेश्वर मंदिरयह एक मात्रा ३ घंटे की पूजा है लेकिन इस पूजा से काल सर्प दोष के दुष्प्रभावों को समाप्त करके उन प्रभावों को जातक के हित में किया जा सकता है |

अब जातक के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि वह इस पूजा के सर्वप्रथम क्या करे, कहाँ से शुरुआत करे ? इन्हीं सब समस्याओं के लिए हमने आपकी मदद हेतु ये सब जानकारी हमारी वेबसाइट पर दी है |

आप अलग अलग पर विषय पर अलग अलग लेख पढ़ सकते है | आप यह जानकारी पंडित श्री रविशंकर शास्त्री जी से निशुल्क प्राप्त कर सकते है | इस पूजा के लिए जो भी आवश्यक जानकारियां है या फिर आपके मन में उठ रहे प्रश्न है, पंडित जी सभी प्रश्नों का उत्तर आपको देंगे |

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Govind Shastri

वेद शास्त्र संपन्न आचार्य श्री गोविन्द शास्त्री गुरुजी इनका परिवार त्र्यंबकेश्वर मे काल सर्प दोष निवारण केंद्र, त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पीछे रहेते है| गुरुजी को २५ साल का अनुभव है| गुरुजी काल सर्प पूजा मे विशारद है, उन्होने २२००० से ज़्यादा काल सर्प की पूजाए की है और सभी यजमानोको १००% संतुष्टि दी है| सभी यजमान जो काल सर्प पूजा करके जाते है उन्हे तुरंत कुछ दीनो मे अच्छे रिज़ल्ट मिलने शुरू हो जाते है|
पूरे भारत मे सिर्फ़ त्र्यंबकेश्वर मे ही काल सर्प पूजा की जाती है क्योंकि त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की असाधारण विशेषता है, जिसमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र का प्रतीक है।

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