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कालसर्प दोष क्या होता है , काल सर्प योग क्या होता है

क्या है काल सर्प योग या काल सर्प दोष ?

काल सर्प योग या काल सर्प दोष किसी जातक की कुंडली में ऐसा योग है जो जातक के पूर्वजन्म के किसी जघन्य अपराध के कारण होता है | इस दोष या योग की वजह से जातक के जीवन में कई समस्याएं आती है जो कि आर्थिक,शारीरिक, मासिक, संतान सम्बन्धी, देरी से विवाह सम्बन्धी, वैवाहिक जीवन में खटपट सम्बन्धी हो सकती है | यह दोष अन्य ज्योतिष दोषों में सबसे बुरा समझा जाता है |

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कैसे जाने आपकी कुंडली में है यह दोष ?

यदि जातक की कुंडली में समस्त ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते है को यह दोष प्रदर्शित होता है | काल सर्प दोष का प्रभाव जातक पर उसके कुन्डली में ग्रहों की स्तिथिनुसार होता है | जातक के जीवन पर इस दोष का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन से घर में कौन सा ग्रह विराजमान है व कौन सा ग्रह प्रबल है | जातक की कुंडली में इस दोष के विद्धमान मात्र होने से जातक को विचलित नहीं होना चाहिए | जातक किसी विद्वान ज्योतिष से अपनी कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण करके इस दोष के परिणामों का आकलन कर सकता है | ज्योतिष विशेषज्ञ जातक को इस दोष के बारे में बता कर उससे बचने के उपाय भी बताएगा | ऐसे ही विद्वान ज्योतिष है, त्रयंबकेश्वर (नासिक ) मंदिर में स्थित पंडित श्री रविशंकर जी | आप इनको अपनी कुंडली भेजकर निशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते है |

काल सर्प योग के प्रकार

जैसा की हमने पाठको को बताया की ग्रहों की स्तिथि के अनुसार जातक पर काल सर्प योग के प्रभाव होते है | इन्ही ग्रहो की स्तिथि यह सुनिश्चित करती है की जातक की कुंडली में स्थित काल सर्प योग कौन से प्रकार का है | यह कुल १२ प्रकार का हो सकता है |

  1. अनन्त कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु लग्न में हो तथा केतु सप्तम में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में हों तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  2. कुलिक कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु दूसरे घर में तथा केतु अष्टम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  3. वासुकी कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु तीसरे घर में तथा केतु नवम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  4. शंखपाल कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु चौथे घर में और केतु दशम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  5. पद्म कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु पंचम घर में और केतु एकादश स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  6. महापद्म कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु छठे घर में और केतु बारहवे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  7. तक्षक कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु सप्तम घर में और केतु लग्न में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  8. कर्कोटक कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु अष्टम घर में और केतु दूसरे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  9. शंखचूड़ कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु नवम घर में और केतु तीसरे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  10. घातक कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु दशम घर में और केतु चौथे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  11. विषधार कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु ग्यारवे घर में और केतु पांचवें स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच मंं ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।
  12. शेषनाग कालसर्प योग : जब जातक की कुंडली में राहु बारहवें घर में और केतु छठें स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

काल सर्प दोष से होने वाले नुकसान

  • दाम्पत्य जीवन में तनाव
  • संतान सुख का अभाव
  • शारीरिक एवं मानसिक
  • विवाह में देरी
  • वित्तीय सम्बन्धी परेशानियां
  • पदोनत्ति में बाधा
  • व्यापार में हानि

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क्या काल सर्प दोष हमेशा हानिकारक है ?

लोगों के बीच में अक्सर यह भ्रान्ति पाई जाती है कि काल सर्प योग जातक की कुंडली में होने से उसके जीवन में बहुत सारे कष्ट आते है और सब तरह से परेशान रहता है | हालांकि ये सब जानकारी कटु और सच है, किन्तु इसके अलावा काल सर्प योग का दूसरा पक्ष भी है | आपको यह जानकार बड़ा आश्चर्य होगा कि काल सर्प योग कुंडली पर हो और उससे जीवन में लाभ होते हों | हम हर जगह अक्सर इस योग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में पढ़ते व सुनते है किन्तु यदि यह योग किसी जातक के कुंडली पर उपस्थित हो, तो यह योग उसे लाभ भी प्रदान कर सकता है | आइये जानते है ऐसी ही कुछ रोचक जानकारी के बारे में |

  1. काल सर्प योग वाले जातक अपने जीवन में अपार सफलता हासिल करते है यदि राहु उनकी कुंडली में लाभकारी स्थिति में हो | काल सर्प योग वाले जातक ज्यादा मेहनती , ईमानदार और साहसी हो सकते है, इस प्रकार से वो अपने जीवन में सफलता हासिल कर पाते है |
  2. जातक एकाग्रचित होकर अपना कार्य करते है |
  3. जातक साहसी होते है और इस वजह से वो अपने जीवन में अधिक जोखिम उठाने को तैयार रहते है | इस कारण उन्हें सफलता भी मिलती है |
  4. जातक अपनी कमजोरियों से लड़ते है और एक बेहतर अवतार में निखार कर आते है |
  5. जातक की कुंडली में यदि राहु अच्छी स्थिति में हो तो जातक की कल्पना शांति बहुत अच्छी होती है |

काल सर्प दोष के उपाय

  • पीपल के पेड़ को पानी देना
  • भगवान शिव की आराधना करना
  • नियमित मंत्रोच्चारण करना
  • नाग पंचमी को व्रत धारण करना
  • काल सर्प दोष निवारण पूजा

काल सर्प दोष का प्रमुख उपाय त्रयंबकेश्वर में काल सर्प दोष की पूजा करना है | जातक इसके बारे में ज्यादा जानकारी गुरु जी श्री रविशंकर से निशुल्क प्राप्त कर सकते है एवं इनकी परामर्शनुसार पूजा कर सकते है |

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Ravi Shankar Guruji

वेद शास्त्र संपन्न आचार्य श्री रवि शंकर गुरुजी इनका परिवार 120 साल से त्रिम्बकेश्वर मे काल सर्प दोष निवारण केंद्र, त्रिम्बकेश्वर मंदिर के पीछे रहेते है| गुरुजी को २५ साल का अनुभव है| गुरुजी काल सर्प पूजा मे विशारद है, उन्होने २२००० से ज़्यादा काल सर्प की पूजाए की है और सभी यजमानोको १००% संतुष्टि दी है| सभी यजमान जो काल सर्प पूजा करके जाते है उन्हे तुरंत कुछ दीनो मे अच्छे रिज़ल्ट मिलने शुरू हो जाते है|
पूरे भारत मे सिर्फ़ त्रिम्बकेश्वर मे ही काल सर्प पूजा की जाती है क्योंकि त्रिम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की असाधारण विशेषता है, जिसमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र का प्रतीक है।

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1 thought on “काल सर्प दोष या योग क्या है?

  1. मेरा जन्म 2 /07/2000 को सुबह 7.50बजे हुआ है। मुझे ज्ञात हुआ है कि मेरी कुंडली मे अनन्त काल सर्प दोष है कृपया इसकी पुष्टि कीजिये। और बताइए कि क्या ये मेरे लिए हानिकारक होगा या लाभदायक। और मेरे लिये भविष्य में क्या सम्भावनाये है।

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